May 29, 2024 1:08 pm

2000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण के परिणाम

बैंकों और बाजार पर 2000 रुपये के नोटों के बंद होने से इस पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाने के लिए इस प्रेस रिव्यू को पुनर्लेखन करें। भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्धारित किया है कि 2000 रुपये के नोटों की सर्कुलेशन बंद की जाएगी, जिससे बैंकों में जमा राशि और मुद्रा बाजार में नकदी की मात्रा में वृद्धि होगी। हिंदी दैनिक द हिंदू ने इस रिपोर्ट को एक शोध पर आधारित औपचारिक छपाई की है। प्रेस रिव्यू में पहले पढ़ें कि 2000 रुपये के नोटों की सर्कुलेशन से बाहर होने से बैंकों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में यह खबर है। अख़बार ने शोध रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि यदि बाजार में मौजूद 2000 रुपये के नोटों का एक तिहाई भी बैंकों में लौट जाए, तो इससे उनके जमा राशि और बाजार में नकदी की मात्रा 40,000 करोड़ रुपये से 1.1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस दिशा में भी संकेत दिया गया है कि जिन लोगों ने अब तक दो हज़ार रुपये के नोटों की संचय की थी, वे अब उन्हें गहने खरीदने और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, ताकि वे करों से बच सकें। आरबीआई ने बताया है कि वर्तमान में यह गुलाबी नोटें वैध नोट ही रहेंगी, लेकिन लोगों को 30 सितंबर तक इन्हें बैंकों में जमा करना होगा। "क्वांटीको रिसर्च" नामक रिसर्च कंपनी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नोटों के सम्बंध में इस डेडलाइन के बाद का हाल अभी तक स्पष्ट नहीं है। हालांकि, अगले चार महीनों में इन नोटों के बैंकों में जमा होने की गति को देखते हुए, 2016 की नोटबंदी की यादें फिर से ताजगी पा सकती हैं। इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में वर्तमान में 3.7 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के 2000 रुपये के नोट मौजूद हैं। यह नोटें सामान्यतः घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.3% और मार्च महीने तक सर्कुलेशन (चलन) में रही नकदी के 10.8% का हिस्सा हैं। रिसर्च कंपनी ने रिपोर्ट में इस नोटों के बैंकों तक नियमित समय पर वापस आने की स्थिति में, बैंकों के जमा आधार में महत्वपूर्ण वृद्धि होने का अनुमान लगाया है। क्वॉन्टइको द्वारा नेतृत्वित शुभदा राव की अर्थशास्त्री टीम ने इस पर भी संकेत दिया है कि 2000 रुपये के नोट आमतौर पर लेन-देन में उपयोग नहीं होते थे। हालांकि, लोग इसका उपयोग सतर्कता या कर बचाने के लिए करते थे। इन दोनों मामलों के कारण, नोटों की जमा की मात्रा बैंकों में बढ़ेगी, लेकिन यह बहुमुखी स्थिति अस्थायी होगी क्योंकि लोग अंततः छोटे नोटों का उपयोग करने लगेंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रकटित आय के कारण रियल एस्टेट और सोने जैसी महंगी वस्तुओं की मांग बढ़ेगी, जिसे 2016 की नोटबंदी के बाद भी देखा गया था। अंत में, रिपोर्ट यह कहती है कि यदि मान लिया जाए कि जमाखोरी की मात्रा का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा चलन में लौटता है, तो इससे बैंकों के जमा आधार पर स्थायी प्रभाव होगा और बाजार में नकदी की मात्रा 400 से 1100 अरब रुपये के बीच रहेगी। भारतीय स्टेट बैंक ने रविवार को इस बात की घोषणा की है कि ग्राहकों को 2000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए किसी आवेदन या आईडी प्रूफ की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, एक ग्राहक एक बार में केवल 10 नोटों को ही बदल सकेगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले शुक्रवार को 2000 रुपये के नोटों को सर्कुलेशन से हटाने की घोषणा की थी। आरबीआई ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया है कि ये नोट वैध रहेंगे और 30 सितंबर 2023 तक उन्हें बैंकों में जमा किया जा सकता है। सभी बैंकों को नोटों की बदली के लिए निर्देश दिए गए हैं। स्टेट बैंक ने अपने सभी लोकल हेड कार्यालयों के चीफ जनरल मैनेजर को निर्देश दिए हैं कि ग्राहक बिना किसी स्लिप के 2000 के 10 नोटों को बदल सकते हैं। आरबीआई ने अपने खाते में 2000 के नोट जमा करने की सीमा की घोषणा अभी तक नहीं की है। याद दिलाने के लिए, नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी और इसके बाद सरकार ने गुलाबी रंग के नए 2000 रुपये के नोट जारी किए थे।

भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्धारित किया है कि 2000 रुपये के नोटों की सर्कुलेशन बंद की जाएगी, जिससे बैंकों में जमा राशि और मुद्रा बाजार में नकदीकी मात्रा में वृद्धि होगी। हिंदी दैनिक द हिंदू ने इस रिपोर्ट को एक शोध पर आधारित औपचारिक छपाई की है।

प्रेस रिव्यू में पहले पढ़ें कि 2000 रुपये के नोटों की सर्कुलेशन से बाहर होने से बैंकों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में यह खबर है। अख़बार ने शोधरिपोर्ट के आधार पर बताया है कि यदि बाजार में मौजूद 2000 रुपये के नोटों का एक तिहाई भी बैंकों में लौट जाए, तो इससे उनके जमा राशि औरबाजार में नकदी की मात्रा 40,000 करोड़ रुपये से 1.1 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में इस दिशा में भी संकेत दिया गया है कि जिन लोगों ने अब तक दो हज़ार रुपये के नोटों की संचय की थी, वे अब उन्हें गहनेखरीदने और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, ताकि वे करों से बच सकें।

आरबीआई ने बताया है कि वर्तमान में यह गुलाबी नोटें वैध नोट ही रहेंगी, लेकिन लोगों को 30 सितंबर तक इन्हें बैंकों में जमा करना होगा। “क्वांटीकोरिसर्च” नामक रिसर्च कंपनी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि इस नोटों के सम्बंध में इस डेडलाइन के बाद का हाल अभी तक स्पष्ट नहीं है।हालांकि, अगले चार महीनों में इन नोटों के बैंकों में जमा होने की गति को देखते हुए, 2016 की नोटबंदी की यादें फिर से ताजगी पा सकती हैं।

इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में वर्तमान में 3.7 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के 2000 रुपये के नोट मौजूद हैं। यह नोटें सामान्यतःघरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.3% और मार्च महीने तक सर्कुलेशन (चलन) में रही नकदी के 10.8% का हिस्सा हैं।

रिसर्च कंपनी ने रिपोर्ट में इस नोटोंके बैंकों तक नियमित समय पर वापस आने की स्थिति में, बैंकों के जमा आधार में महत्वपूर्ण वृद्धि होने का अनुमान लगाया है।

क्वॉन्टइको द्वारा नेतृत्वित शुभदा राव की अर्थशास्त्री टीम ने इस पर भी संकेत दिया है कि 2000 रुपये के नोट आमतौर पर लेन-देन में उपयोग नहीं होतेथे। हालांकि, लोग इसका उपयोग सतर्कता या कर बचाने के लिए करते थे। इन दोनों मामलों के कारण, नोटों की जमा की मात्रा बैंकों में बढ़ेगी, लेकिन यह बहुमुखी स्थिति अस्थायी होगी क्योंकि लोग अंततः छोटे नोटों का उपयोग करने लगेंगे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रकटित आय केकारण रियल एस्टेट और सोने जैसी महंगी वस्तुओं की मांग बढ़ेगी, जिसे 2016 की नोटबंदी के बाद भी देखा गया था। अंत में, रिपोर्ट यह कहती है कियदि मान लिया जाए कि जमाखोरी की मात्रा का 10 से 30 प्रतिशत हिस्सा चलन में लौटता है, तो इससे बैंकों के जमा आधार पर स्थायी प्रभाव होगाऔर बाजार में नकदी की मात्रा 400 से 1100 अरब रुपये के बीच रहेगी।

भारतीय स्टेट बैंक ने रविवार को इस बात की घोषणा की है कि ग्राहकों को 2000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए किसी आवेदन या आईडी प्रूफकी आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, एक ग्राहक एक बार में केवल 10 नोटों को ही बदल सकेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले शुक्रवार को 2000 रुपये के नोटों को सर्कुलेशन से हटाने की घोषणा की थी। आरबीआई ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया है कि ये नोट वैध रहेंगे और 30 सितंबर2023 तक उन्हें बैंकों में जमा किया जा सकता है। सभी बैंकों को नोटों की बदली के लिए निर्देश दिए गए हैं।

स्टेट बैंक ने अपने सभी लोकल हेडकार्यालयों के चीफ जनरल मैनेजर को निर्देश दिए हैं कि ग्राहक बिना किसी स्लिप के 2000 के 10 नोटों को बदल सकते हैं। आरबीआई ने अपनेखाते में 2000 के नोट जमा करने की सीमा की घोषणा अभी तक नहीं की है। याद दिलाने के लिए, नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी।

 

 

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Shaan
Author: Shaan

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